सुन ओ बदरिया
मेरे सांवरिया
लेकर मुझे तू चल वहीं
जहा सपनो (ख्वाबों) के सागर से मिलता जहां हो
तारो से सजा आसमा हो
प्यार की बूंदे बरसती हो
समा में थोड़ी मस्ती हो
ओह ओ हो हो
क्या खोया और क्या पाया
ख्वाब अधूरा क्यूं छोड़ आया
डूंडे काफिर अब किसको तू
खुद से नाता जब तोड़ आया
सपनो के शेहर में, तेरा जहां है
ख्वाबों की कस्ती चली, तू कहां है
सफर है सफर जी ले इसे तू
यार मेरे मंजिल दूर कहां है
ओह ओ हो हो
सुन ओ बदरिया
मेरे सांवरिया
लेकर मुझे तू चल वहीं
जहा सपनो के सागर से मिलता जहां हो
तारो से सजा आसमा हो
प्यार की बूंदे बरसती हो
समा में थोड़ी मस्ती हो
ओह ओ हो हो
Shashank Sahay: अरे ओ मर्दे
आवाज उठाव
क्रांति लाव क्रांति लाव क्रांति लाव लाव लाव
अरे ओ मर्दे
आवाज उठाव
ई गुलामी से आजादी दिलाव
सुना ओ मर्दे
कब तक सहबा
ई गरीबी बेरोजगारी आ लाठीयन के
सुना ओ मर्दे
कब तक सहबा
ई गुंडे राज़ के
चला ओ मर्दे
आज तू बोला
ना त सन्नाटा आईएसन छाई
चला ओ मर्दे
आज तू बोला
ना त देश ई जल जाई
अरे ओ मर्दे
होखे ना देहाम
कलम के केहू के गुलाम
अरे ओ मर्दे
होखे ना देहम
चाहे हो जाए हम कुर्बान
सुना ओ मर्दे
बदलाव लाव
अपना हक़ के खातिर लड़ कट जा
सुना ओ मर्दे
बदलाव लाव
अपन आजादी के तू पाव
अरे ओ मर्दे
हार ना मान
चाहे हो जाए कुछ भी आज
अरे ओ मर्दे
हार ना मान
जब तक न मिले इंसाफ़
सुना ओ मर्दे आज लगाद क्रांति के आईसन आग
जौन ना बुझी हमरा तहरा मारला के भी बाद
अरे ओ मर्दे इनका बताव ना चली इनकर तानाशाही
अरे ओ मर्दे
अरे ओ मर्दे इनका बताव
हम लेकर रेहम आजादी
हम लेकर रेहम आजादी
हम लेकर रेहम आजादी