Sundar Kand Doha 27-Ajaay Ranaa

Sundar Kand Doha 27

歌手:Ajaay Ranaa

时间:2026-05-28

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歌词

॥ दोहा 27 ॥

जनकसुतहि समुझाइ करि बहु बिधि धीरजु दीन्ह,चरन कमल सिरु नाइ कपि गवनु राम पहिं कीन्ह।

॥ चौपाई ॥

चलत महाधुनि गर्जेसि भारी।गर्भ स्रवहिं सुनि निसिचर नारी॥

नाघि सिंधु एहि पारहि आवा।सबद किलिकिला कपिन्ह सुनावा॥

हरषे सब बिलोकि हनुमाना।नूतन जन्म कपिन्ह तब जाना॥

मुख प्रसन्न तन तेज बिराजा।कीन्हेसि रामचन्द्र कर काजा॥

मिले सकल अति भए सुखारी।तलफत मीन पाव जिमि बारी॥

चले हरषि रघुनायक पासा।पूँछत कहत नवल इतिहासा॥

तब मधुबन भीतर सब आए।अंगद संमत मधु फल खाए॥

रखवारे जब बरजन लागे।मुष्टि प्रहार हनत सब भागे॥

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