
时间:2026-01-23
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जय जय शिव शंकर
जय त्रिपुरारी
जय जय पार्वती माता
उमा भवानी
कैलाश की चोटी पे
बरसें कृपा की धार
जटाओं से बहता गंगाजल
मन हो जाए निर्मल आज
नंदी की घंटी बजती
डमरू की मधुर रुनझुन
माता के चरणों में झुककर
कह दूँ सारी उलझन
शिव शिव बोले माँ पार्वती
हम पर रखो अपनी दया
दुख सब हर लो भोलेनाथ
ममता बरसाओ जगदम्बा
शिव शिव बोले माँ पार्वती
सफ़ेद भस्म की लकीरें
माथे पर त्रिपुण की शान
मंगलमूर्ति तुम दोनों
हम हैं छोटे से मेहमान
आँखों में नेत्रों का तेज
चेहरे पर अद्भुत सी शांति
एक तरफ़ करुणा की सरिता
एक तरफ़ वैराग्य की ज्योति
कभी तुम पिता
कभी तुम माता
कभी हो सखा हमारे
भक्त तुम्हारे रोते हँसते
लीलो सारे संताप हमारे