चल शहर की गलियों में खो जाए
जहां रोशनी भी धुंधली हो जाए
टूटे सपनों की आवाजें
हर कोने में बिखरी हैं बातें
सड़कें बोलें धीमे-धीमे
रातें सजें काले-नीले
चमकती इमारतें
नकली चेहरे
सच दबा है
पर कौन कहे रे
तू भी तो है यहां
खुद से ही अंजान
शहर की चाल पे
तेरा दिल परेशान
सिटी लाइट्स में खो गया रे
दिल का शोर सुनो जरा रे
सिटी लाइट्स
सिटी लाइट्स
कौन है असली
कौन है पराए
बासलाइन गूंजे दिल की धड़कन में
सिंथ्स बजें जैसे बारिश के राग में
फंकी वायलिन
वो बेताब लहरें
जैसे तूफान से पहले की गहराई
हर गली में इक कहानी छुपी
हर रौशनी में परछाईं बसी
तू भी तो लिख
अपना एक किस्सा
इस शोर में खोने का हिस्सा