Sundar Kand Doha 13-Ajaay Ranaa

Sundar Kand Doha 13

歌手:Ajaay Ranaa

时间:2026-05-28

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歌词

॥ दोहा 13 ॥

कपि के बचन सप्रेम सुनि उपजा मन बिस्वास,जाना मन क्रम बचन यह कृपासिंधु कर दास।

॥ चौपाई ॥

हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी।सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥

बूड़त बिरह जलधि हनुमाना।भयहु तात मो कहुँ जलजाना॥

अब कहु कुसल जाउँ बलिहारी।अनुज सहित सुख भवन खरारी॥

कोमलचित कृपाल रघुराई।कपि केहि हेतु धरी निठुराई॥

सहज बानि सेवक सुखदायक।कबहुँक सुरति करत रघुनायक॥

कबहुँ नयन मम सीतल ताता।होइहहिं निरखि स्याम मृदु गाता॥

बचनु न आव नयन भरे बारी।अहह नाथ हौं निपट बिसारी॥

देखि परम बिरहाकुल सीता।बोला कपि मृदु बचन बिनीता॥

मातु कुसल प्रभु अनुज समेता।तव दुख दुखी सुकृपा निकेता॥

जनि जननी मानह जियँ ऊना।तुम्ह ते प्रेमु राम कें दूना॥

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