नदी के किनारे ठहरी हवा
खामोशी में छुपा था एक रास्ता
बहुत दिन रोके रखा था जिसे
आज उस बात को कहना हुआ
सांसों में एक ठंडी ढलान है
अब और न छुपाने का इरादा है
आबशार की तरह बहने दो
जो दिल में है आज कहने दो
आबशार की तरह बहने दो
मुझको बस तुम में बह जाने दो
पहाड़ों की ठंडक, बहता पानी
खत्म हुई वह पुरानी कहानी
अब कोई पर्दा, कोई दीवार नहीं
खुद से भी अब कोई इंकार नहीं
सांसों में एक ठंडी ढलान है
अब और न छुपाने का इरादा है
आबशार की तरह बहने दो
जो दिल में है आज कहने दो
आबशार की तरह बहने दो
मुझको बस तुम में बह जाने दो
चुप रहने का वो दौर बीत गया
तेरा नाम होठों पे जीत गया
अब न रोकेंगे बहते हुए पल को
आज में शामिल कर लेंगे कल को
आबशार की तरह बहने दो
जो दिल में है आज कहने दो
आबशार की तरह बहने दो
मुझको बस तुम में बह जाने दो
बस बह जाने दो
आबशार
(बह जाने दो)