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संयम संयम जय हो संयम संयम
संयम संयम जय हो संयम संयम
विजय तिलक कर निकल पड़े वो......(२) आत्मोद्धार के मार्ग पे
कर स्विकार प्रवज्या पाया, सुख संसार को त्याग के
किया समर्पण निज आतम का, राग द्वेष को छोड़ के
गुरु चरणों में किया बसेरा, स्वार्थ के बंधन तोड़ के
मुस्काते चेहरे से अपने, राह कठिन अपनाई,
करते लाखों वंदन तुमको, देते आज बधाई
वंदन वैरागी, अभिनंदन वैरागी, (२)
मोक्ष मार्ग पे कदम बढ़ाए, देखो वैरागी
वंदन वैरागी, अभिनंदन वैरागी, (२)