HU-Abhay patel
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歌词

पहाड़ों के बीच बैठकर मैं लिखता हूँ,

अपनी ही तन्हाईयों को खुद से छिपाता हूँ।

हर बार कोई नया ख्वाब तोड़ आता हूँ

फिर से दिल को दर्द से संभालता हूँ।

मैं जब भी लिखता हूं तेरे ही बारे में लिखता हूं

तेरी बाहों में मिलकर, सारी दुनिया भूल जाऊं। तेरी खुशबू में खोकर, खुद को खो जाऊं।"

तेरे ख्वाबों का सफर, दिल को ले जाता है।

हर लम्हा तेरी यादों में, खो जाता है।

फिर भी तेरे ही ख्वाब याद आते है

मैं तुझसे कितना भी दूर चला जाऊं मेरे जुबा पर तेरा ही नाम रहता है

फिर भी मैं तेरे पास रहकर मैं तुझे नजर नहीं आता हूं

बारिश की बूंदों में, तेरी यादें छुपाता हूँ।

धूप की किरणों में, तेरी मुस्कान ढूंढता हूँ।

जीने की राहों पर, तेरी यादों का साथ ले कर चलता हूँ। तेरे बिना जीना सीखता हूँ, खुद को संभालता हूँ।

तेरी बाहों में मिलकर, सारी दुनिया भूल जाऊं। तेरी खुशबू में खोकर, खुद को खो जाऊं।"

हवा के झोंकों में, तेरी मिठास महसूस करता हूँ।

प्रेम के रास्ते पर, तेरी यादों को संभालता हूँ।

तेरी हंसी की मुस्कान, जीवन को रोशन करती है।

तेरे प्यार में खोकर, खुद को भूल जाता हूँ।

रात की चांदनी में, तेरे साथ घूमता हूँ।

तारों के बीच में, तेरा नाम चुनता हूँ।

तेरी यादों का आलम, दिल को भरता हूँ।

तेरे प्यार में खोकर, खुद को बचाता हूँ।

प्यार की राहों में, तेरी बातों को सुनता हूँ,

खुद को तेरे आगे, मैं चुपचाप झुकता हूँ।

तेरी मुस्कान के साथ, मैं खुद को बुलाते हैं।तेरे ख्वाबों का सफर, दिल को आबाद करता है,

तेरी यादों के साथ, जीने का सवाद भरता है।

तेरी हर बात पे, मैं दिल को समझाता हूँ,

तेरे प्यार में खोकर, खुद को मिटाता हूँ।

तेरे साथ चलते हुए, जीवन की राहों में, तेरी यादों का साथ, मैं हर दर्द भूलता हूँ।

तेरी आँखों का नूर, मेरी रातों को रोशन करता है, तेरी मोहब्बत में, अभय खुद को खो जाता हूँ।

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