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मन मयूर ये, नाच उठा,
सुन तेरी बंसी ओ घनश्याम!
मधुर मधुर सुर, धुन तेरी तान,
मुझको छेड़ें, ओ घनश्याम!
हूं जनम जनम की, मैं तेरी दासी,
दर्शन की तेरे, मैं हू अभिलाषी,
दर्शन की तेरे, मैं हूँ प्यासी,
अब दर्शन दो मुझे, ओ घनश्याम!...
राधा कृष्ण को प्यारी है, प्राणों से ज्यादा,
मोहन मीरा के प्राण हैं, ये कैसा है नाता,
है लीला अपरंपार तेरी, माया ओ घनश्याम!.