
时间:2026-11-01
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धूल माथे लगाई तिलक हो गया
टूटा सारा भरम मन सरल हो गया
मौन मेरा यहाँ प्रार्थना बन गया
दर्द को स्वर मिला तो भजन हो गया
भस्म तन पर रमी ये असर हो गया
काल का भय मिटा मैं अमर हो गया
साँस की लौ जो ईश्वर से जा मिली
शिव से मिलकर के मैं शिव हो गया
घाट की सीढ़ियों पर नमन हो गया
भस्म की आरती में मगन हो गया
राख जलती चिता की जो माथे लगी
मृत्यु का भी वहीं पर हवन हो गया
भस्म तन पर रमी ये असर हो गया
काल का भय मिटा मैं अमर हो गया
साँस की लौ जो ईश्वर से जा मिली
शिव से मिलकर के मैं शिव हो गया
डम डमा डम बजा, मन गगन हो गया
बंद पलकों में शिव का दरस हो गया
धार गंगा की जो उन जटाओं में थी
आँख का नीर ही आचमन हो गया
भस्म तन पर रमी ये असर हो गया
काल का भय मिटा मैं अमर हो गया
साँस की लौ जो ईश्वर से जा मिली
शिव से मिलकर के मैं शिव हो गया
मैं जिसे"मैं" कहूँ, वो दहन हो गया
दूर कैलाश था, अब निकट हो गया
जिसको ढूँढा किया उम्र भर दर-ब-दर
वो मेरे ही हृदय में प्रकट हो गया
भस्म तन पर रमी ये असर हो गया
काल का भय मिटा मैं अमर हो गया
साँस की लौ जो ईश्वर से जा मिली
शिव से मिलकर के मैं शिव हो गया
साँस की लौ जो ईश्वर से जा मिली
शिव से मिलकर के मैं शिव हो गया