Sundar Kand Doha 46-Ajaay Ranaa

Sundar Kand Doha 46

歌手:Ajaay Ranaa

时间:2026-05-28

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歌词

॥ दोहा 46 ॥

तब लगि कुसल न जीव कहुँ सपनेहुँ मन बिश्राम,जब लगि भजत न राम कहुँ सोक धाम तजि काम।

॥ चौपाई ॥

तब लगि हृदयँ बसत खल नाना।लोभ मोह मच्छर मद माना॥

जब लगि उर न बसत रघुनाथा।धरें चाप सायक कटि भाथा॥

ममता तरुन तमी अँधिआरी।राग द्वेष उलूक सुखकारी॥

तब लगि बसति जीव मन माहीं।जब लगि प्रभु प्रताप रबि नाहीं॥

अब मैं कुसल मिटे भय भारे।देखि राम पद कमल तुम्हारे॥

तुम्ह कृपाल जा पर अनुकूला।ताहि न ब्याप त्रिबिध भव सूला॥

मैं निसिचर अति अधम सुभाऊ।सुभ आचरनु कीन्ह नहिं काऊ॥

जासु रूप मुनि ध्यान न आवा।तेहिं प्रभु हरषि हृदयँ मोहि लावा॥

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