Sundar Kand Doha 49-Ajaay Ranaa

Sundar Kand Doha 49

歌手:Ajaay Ranaa

时间:2026-05-28

    使用手机浏览器「扫一扫」

    在手机上保存,获得更好体验

标签
歌词

॥ दोहा 49 ॥

रावन क्रोध अनल निज स्वास समीर प्रचंड,जरत बिभीषनु राखेउ दीन्हेउ राजु अखंड॥(क)।

जो संपति सिव रावनहि दीन्हि दिएँ दस माथ,सोइ संपदा बिभीषनहि सकुचि दीन्हि रघुनाथ॥(ख)॥

॥ चौपाई ॥

अस प्रभु छाड़ि भजहिं जे आना।ते नर पसु बिनु पूँछ बिषाना॥

निज जन जानि ताहि अपनावा।प्रभु सुभाव कपि कुल मन भावा॥

पुनि सर्बग्य सर्ब उर बासी।सर्बरूप सब रहित उदासी॥

बोले बचन नीति प्रतिपालक।कारन मनुज दनुज कुल घालक॥

सुनु कपीस लंकापति बीरा।केहि बिधि तरिअ जलधि गंभीरा॥

संकुल मकर उरग झष जाती।अति अगाध दुस्तर सब भाँति॥

कह लंकेस सुनहु रघुनायक।कोटि सिंधु सोषक तव सायक॥

जद्यपि तदपि नीति असि गाई।बिनय करिअ सागर सन जाई॥

展开显示全部歌词