मुखड़ा
भागो ही काहे तो दूर गे रहें भीरे भीरे
पानी लगले अब गिरे रे छौड़ा धीरे धीरे
अंतरा
ऐतो माजा बड़ी सटेने पास
घारा में मैय्या देखें होते आश
चलेने लूटे लहार नदी के तीरे तीरे
पानी लगले अब गिरे रे छौड़ा धीरे धीरे
अंतरा
करे दे छौड़ी गे मन भर मस्ती
सुने अमितवा नाय कर जबरदस्ती
बदला में हम तोरा देवो गे सोना चानी हीरे
पानी लगले अब गिरे रे छौड़ा धीरे धीरे