ढूँढा जिसे दिल ने कहीं किसी और में,
मुझ में ही था बस रही अनजान मैं
देखूँ कभी अब जो बीते सायों को,
हँसी होठों पे और हूँ हैरान मैं
रूबरू आयी है अब ये ज़िंदगी,
कहती है कर ले आ मुझसे बंदग़ी
रंग नए ख़ाब तू दिल की दीवार पे,
मिल तू भी तेरे नए किरदार से
सोचो ना अब जो हुआ सो हो गया,
बीता हुआ कल तो कब का सो गया
पिछले सफ़र की डगर का हाद्सा,
पिछले सफ़र की रात में खो गया
रूबरू आयी है अब ये ज़िंदगी,
कहती है कर ले आ मुझसे बंदग़ी
रंग नए ख़ाब तू दिल की दीवार पे,
मिल तू भी तेरे नए किरदार से