Sundar Kand Doha 10-Ajaay Ranaa

Sundar Kand Doha 10

歌手:Ajaay Ranaa

时间:2026-05-28

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歌词

॥ दोहा 10 ॥

भवन गयउ दसकंधर इहाँ पिसाचिनि बृंद,सीतहि त्रास देखावहिं धरहिं रूप बहु मंद।

॥ चौपाई ॥

त्रिजटा नाम राच्छसी एका।राम चरन रति निपुन बिबेका॥

सबन्हौ बोलि सुनाएसि सपना।सीतहि सेइ करहु हित अपना॥

सपनें बानर लंका जारी।जातुधान सेना सब मारी॥

खर आरूढ़ नगन दससीसा।मुंडित सिर खंडित भुज बीसा॥

एहि बिधि सो दच्छिन दिसि जाई।लंका मनहुँ बिभीषन पाई॥

नगर फिरी रघुबीर दोहाई।तब प्रभु सीता बोलि पठाई॥

यह सपना मैं कहउँ पुकारी।होइहि सत्य गएँ दिन चारी॥

तासु बचन सुनि ते सब डरीं।जनकसुता के चरनन्हि परीं॥

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