धान रोपनी अमित जी
मोरी भी तैयार है बरस गेलऔ बदरा
खोंस ले तों साड़ी माथे धरके गेअंचरा
चल धानी चलैं करे रोपनीयां
सूघर सूकवार देह बूझा परेसानी
नीचे कादो कीचड़ उपर बरसतै पानी
होतो राजा हमरा से नय रोपनीयां
अंतरा __१
जईसे सिंगार बीना बिहून नारी लागै हे
धनीयां नारी लागै हे
धानी हे ओईसैय बीहून खेती बीना सगरो
खेता के कीयारी लागै हे --२
ई सब कबो कैलीयै ना हमें नईहर में
ठीठूरतै हांथ देह जरतै दूपहर में
होतो नय राजा हमरा से रोपनीयां --२
चलैं धानी चलैं करे रोपनीयां--२
अंतरा --२
परती ई धरती के लगन अईलय हे
धनीयां लगन अईलय हे
धानी हे रोपी ऐकरा करीदा गुलजार उबजते
अगहन झुमका गढ़ाई देबो हे --२
उमाशंकर रहे परतो दीन भर साथ में
मोरी ला ला देते रहभो हमरा तों हांथ में
त मीली जूल करबै चल रोपनीयां --२